उजाला महिला बहुउद्देशीय सहकारी संघ मर्यादित, बीरगांव (ALF) की सफलता की कहानी
समाज की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाकर उन्हें सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से इन महिलाओं के द्वारा उजाला महिला बहुउद्देशीय सहकारी संघ मर्यादित, बीरगांव का पंजीयन कराया गया है। संघ की सफलता की कहानी निम्नानुसार है -
सामान्य जानकारी वर्ष 2023-24 की स्थिति में :-
1. पंजीयन क्रमांक व दिनांक : 419/24.11.2017
2. सदस्य संख्या : 187
3. ग्रामों की संख्या : 6 ग्राम
4. अधिकृत अंशपूंजी : 1,23,000.00
5. चुकता अंशपूंजी : ₹1,00,000.00
6. संचालक मण्डल के सदस्य : 11
7. टर्नओवर : 15,42,000.00
8. लाभ : 2,74,000.00
9. रिजर्व फण्ड : 3,57,000.00
10. लाभांश वितरण का प्रतिशत : 100 प्रतिशत
11. ईमेल आईडी : nulmbrigaon@gmail-com
12. दूरभाष कमांक : 9516422282
उजाला महिला बहुउद्देशीय सहकारी संघ मर्यादित बीरगांव (ALF) का गठन दिनांक 05 मई 2017 को किया गया।
इस (ALF) में 17 समूह, सदस्य संख्या 181 है। ये संघ नगर पालिक निगम बीरगांव क्षेत्रांतर्गत कुल 06 ग्रामों (उरला, अछोली, रावांभाठा, उरकुरा, बीरगांव एवं सरोरा) में स्थापित मणिकंचन केन्द्र के माध्यम से मिशान क्लीन सिटी का कार्य करते है।
उजाला महिला बहुउद्देशीय सहकारी संघ मर्यादित बीरगांव वर्तमान में 187 महिला सदस्यीय संघ है। ये संघ नगर पालिक निगम बीरगांव में जुलाई 2017 से मिशन वलीन सिटी का कार्य कर शहर की स्वच्छता में योगदान देते हुए अपना जीवन यापन कर रहीं है। संघ की अध्यक्ष श्रीमति ममता ध्रुव के नेतृत्व में इस कार्य को किया जा रहा है।
मिशन क्लीन सिटी के कार्य की शुरूआत :-
संघ की महिलाएं रोज सुबह 06:30 बजे से अपना कार्य प्रारंभ करती है जिसके तारतम्य में वह सुबह 06:30 बजे निकाय के अपने क्षेत्र अंतर्गत आने वाले मणिकंचन केन्द्र में पहुंचती है। सर्वप्रथम अपनी हाजिरी ऑनलाईन निष्ठा एप्प के माध्यम से दर्ज करती है। तत्पश्चात् 07:00 बजे ई-रिक्शा अथवा ट्राईसाईकल लेकर घर-घर से कचरा संग्रहण हेतु वार्डों के लिए निकलती है। वार्डों में पहुंचकर सिटी बजाकर घर से कचरा देने के लिए नागरिकों से अपील करती है। तथा प्रत्येक घर के लोगों को कचरा पृथक्करण की अनिवार्यता को समझाते हुए कचरा अलग-अलग देने अपील भी करती है। वाडों में लगभग 3:30 घंटे का समय घर-घर से कचरा लेकर 10:30 बजे वह अपने मणिकंचन केन्द्र वापस पहुंचती है। आधा घंटा आराम करने के बाद 11:00 बजे वह वार्डों से लाए कचरे का अंतिम रूप से सेग्रीगेशन (गीला एवं सूखा अलग-अलग) करती है। गीले कचरे को खाद बनाने हेतु कम्पोस्ट पिट में डाला जाता है तथा सूखे कचरे को तौल कर रिसाईकल हेतु लोकल कबाड़ी वाले को विक्रय किया जाता है जिसके बदले इन्हें अतिरिक्त आय भी अर्जित हो जाती है।
कार्य के दौरान परेशानी :-
शहर में जब मिशन क्लीन सिटी योजना प्रारंभ हुई तब से ये संघ कार्य कर रहीं है। संघ की महिलाएं जब कचर लेने घर-घर जाती थी तो लोग उन्हें कचरे का काम करने वाली, हीन भावनाओं की दृष्टि से देखा व तुच्छ समझा जाता था। परन्तु भारत सरकार व राज्य सरकार द्वारा मिशन क्लीन सिटी का वृहद् प्रचार प्रसार तथा समय-समय पर स्वच्छता सम्बंधी सकारात्मक अभियान चलाए जाने के कारण लोग स्वच्छता के महत्व को समझते गए और शहर की स्वच्छता में अपनी भागीदारी निभाने आगे आने लगे। अब लोग भी हमारे कार्य की सराहना करते हैं और स्वच्छता संबंधी कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते है।
परिणाम :-
मिशन क्लीन सिटी के कार्य में ऐसे महिलाएं संलग्न है जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है तथा संघ की महिलाएं पूर्व में उद्योगों में कठिन परिश्रम वाली मजदूरी करती थी। राष्ट्रीय शहरी आजिविका मिशन (डे-एन.यू.एल.एम) एवं स्वच्छ भारत मिशन के संयुक्त प्रयासों से इस कार्य को करने का प्रस्ताव प्राप्त हुआ और इस कार्य को करने से उद्योगों में कठिन परिश्रम वाली मजदूरी से छुटकारा भी मिला। संघ की महिलाओं को शासन द्वारा निर्धारित मानदेय राशि रू. 6000.00 प्रतिमाह प्रति सदस्य दिया जाता है परन्तु ये मानदेय के अतिरिक्त कचरे के विक्रय से सभी सदस्य मिलाकर लगभग राशि रु. 80,000.00 से 90,000.00 प्रतिमाह अतिरिक्त आय अर्जित कर लेती है। इस राशि का उपयोग ये अपने आय में वृध्दि सम्बंधी मल्टिएक्टिविटी में लगाती है।