गतिविधियां -
सहकारिता विधान के अंतर्गत प्रशासकीय दृष्टि से विभाग का मुख्य दायित्व छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 एवं नियम 1962 के अंतर्गत संस्थाओं का सुचारु संचालन सहकारी संस्थाओं का गठन, निरीक्षण, अंकेक्षण तथा शासकीय नीतियों का क्रियान्वयन आदि है। अपनी विकासात्मक भूमिका में विभाग द्वारा प्रदेश के विभिन्न वर्गों के विकास के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाओं का क्रियान्वयन भी किया जाता है जिनमें संस्थागत तथा व्यक्तिगत हितमूलक योजनायें सम्मिलित हैं विभाग सहकारी आन्दोलन का नियमन, नियंत्रण और मार्गदर्शन करते हुए सहकारी संस्थाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर आन्दोलन को सुदृढता प्रदान करने का कार्य करता हैं। विभाग जन-कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन सहकारी संस्थाओं के माध्यम से कराना सुनिश्चित करता है। यह विभाग सहकारी संस्थाओं के गठन, निर्वाचन, अंकेक्षण एवं विवादों के निराकरण, परिसमापन आदि का कार्य अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के अंतर्गत सम्पादित करता है।
विभागीय दायित्व -
- सहकारी सोसाइटियों का पंजीयन, पर्यवेक्षण, निरीक्षण एवं परिसमापन।
- सहकारी सोसाइटियों के विवादों का निपटारा।
- सहकारी सोसाइटियों/व्यक्तिगत सदस्यों को शासन की योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना।
- सहकारी सोसाइटियों के माध्यम से शासन की जन कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन।
- सहकारिता विभाग में कार्यरत अधिकारियों/कर्मचारियों के सेवा में भर्ती तथा सेवा की शर्तों के नियम का क्रियान्वयन।